श्री विष्णुकान्त शास्त्री
 
 

24-11-2000 को राज्यपाल, उत्तर प्रदेष के पद पर सुषोभित हुए जन्म:
2 मई, 1929 ई0 कलकत्ता ।
स्व0 पं0 गांगेय नरोत्तम शास्त्री और स्व0 श्रीमती रूपेष्वरी देवी के आत्मज षिक्षा: एम0ए0, एल0एल0बी0, 1 सारस्वत क्षत्रिय विद्यालय, प्रेसीडेंसी कालेज, विद्यासागर कालेज, कलकत्ता विष्वविद्यालय ।
1952 में एम0ए0 हिन्दी में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान ।
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Term of Office

24-11-2000

to

02-07-2004
24.11.2000 से 02.07.2004 छत्रपति शाहू जी महाराज विष्वविद्यालय, कानपुर द्वारा मानद उपाधि, डी0लिट0 तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा डी. लिट् की मानद उपाधि से सम्मानित ।
विवाह: 26 जनवरी, 1953 को श्रीमती इन्दिरा देवी से जो 1988 में दिवंगता ।
सन्तान: एक पुत्री श्रीमती भारती शर्मा वृत्ति: 1953 में कलकत्ता विष्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए । क्रमषः उन्नति करते हुए आचार्य एवं विभागाध्यक्ष बने ।
आचार्य के पद से कलकत्ता विष्वविद्यालय से 31 मई, 1994 को अवकाष ग्रहण । 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (कलकत्ता शाखा), श्री बड़ा बाजार कुमार सभा, पुस्तकालय, अनामिका (कलकत्ता का एक अग्रणी सांस्कृतिक संस्थान) और भारतीय जनता पार्टी (पष्चिमी बंगाल) के अध्यक्ष रहे ।

बंगीय हिन्दी परिषद के उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मारक समिति के महामंत्री, भारतीय भाषा परिषद के मंत्री और भारत भवन भोपाल के ट्रस्टी भी रहे ।

 सीनेट, कलकत्ता विष्वविद्यालय, कार्यकारी समिति, भारतीय हिन्दी परिषद, हिन्दी अध्ययन बोर्ड इलाहाबाद विष्वविद्यालय, कार्यकारी समिति, कलकत्ता विष्वविद्यालय, बांग्ला देष सहायक समिति, हिन्दी सलाहकार समिति गृह मंत्रालय एवं सूचना प्रसारण मंत्रालय (1977-79) के सदस्य रहे । भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की समिति तथा परामर्ष समिति (1992-98), संसदीय राजभाषा समिति (1994-98) के सदस्य रहे ।
कृतियां मौलिक: ‘कवि निराला की वेदना तथा निबन्ध’, ‘कुछ चंदन की कुछ कपूर की’, ‘चिन्तन मुद्रा’, ‘अनुचिंतन’ (साहित्य समीक्षा), ‘तुलसी के हियहेरि’ (तुलसी केन्द्रित निबंध), ‘‘बांगला देष के सन्दर्भ में,(रिपोताॅज), स्मरण को पाथेय बनने दो’, ‘सुधियां उस चंदन के वनकी’ (यात्रा वृतांत व संसमरण), भक्ति और शरणागत’ (विवेचन), ‘ज्ञान और कर्म’(चिन्तन-दर्शन), ‘

अनंत पथ के यात्री’: धर्मवीर भारती (संस्मरण) । अनूदित: ‘उपकालिदासय’(बांग्ला से हिन्दी), ‘संकल्प-संत्रास-संकल्प’ (बांग्ला देष की संग्रामी कविताओं का काव्यानुवाद), महात्मा गांधी का समाज दर्षन (अंग्रेजी से हिन्दी) । सम्पादित: ‘दर्षन और आज का हिन्दी रंगमंच’, ‘बालमुकंद गुप्त: एक मूल्यांकन’, बांग्ला देष: संस्कृति और साहित्य, ‘तुलसी दासः आज के संदर्भ में’, कलकत्ता 1993’, ‘

अमर आग है’ (अटल बिहार वाजपेई की चुनी हुई कविताओं का संकलन) । ‘

रस वृन्दावन’ धर्मिक मासिक पत्रिका के प्रधान सम्पादक (1979-84) । साहित्यिक: देष भर के विष्वविद्यालयों एवं साहित्यिक संस्थानों की व्याख्यान मालाओं में भागीदारी ।

भक्ति साहित्य के अधिकारी विद्वान । राजनीतिक: 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर पष्चिम बंगाल विधान सभा में विधायक (1982 तक)। 1980 में नवगठित भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए । पष्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष (1982-86)। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (1988-93) । राज्य सभा में सांसद (1992-98), भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य (1980-99) । विदेष यात्रा: सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, बांग्ला देष, कनाडा, रूस, सिंगापुर, मलेषिया व थाईलैंड । सम्मान: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार: उत्तर प्रदेष सरकार द्वारा 1972-73 में ‘कुछ चंदन की कुछ कपूर की’ पुस्तक पर ।
 राज्य साहित्यिक पुरस्कार: उत्तर प्रदेष सरकार द्वारा 1974-75 में ‘‘बांग्ला देष के संदर्भ में’’ पुस्तक पर । विष्ेाष पुरस्कार उत्तर प्रदेष हिन्दी संस्थान द्वारा 1978-79 में ‘स्मरण को पाथेय बनने दो’ पुस्तक पर । रामायण महोत्सव प्रतिष्ठान, चित्रकुट (उ0प्र0) द्वारा 19 मार्च, 1979 को विषिष्ट सम्मानतुलसी साहित्य पर किये गये विषेष कार्य हेतु । साहित्य भूषण सम्मान । डा0 राम मनोहर लोहिया सम्मान । राजर्षि टंडन हिन्दी सेवी सम्मान ।
रामकृष्ण मिषन
 इंस्ट्ीट्यूट आफ कल्चर, कलकत्ता द्वारा 1979 के लिये लेक्चरर के रूप में ‘राम चरित मानस में ज्ञान और भक्ति विषय पर व्याख्यान । 31 जनवरी, 2000 को छत्रपति शाहू जी महाराज विष्वविद्यालय कानपुर द्वारा मानद डी0लिट0 की उपाधि से सम्मानित । 6 अगस्त, 2001 को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा डी0लिट् की उपाधि से सम्मानित ।

 विषेष रूचि: काव्य पाठ्य, भ्रमण, षिक्षा साहित्य, दर्षन के क्षेत्रों में गहन रूचि । अन्य: पष्चिमी बंगाल में बांग्ला देष घुसपैठियों की समस्या को देष के सामने उजागर करने में महत्वपूर्ण योगदान । स्थाई पता: 280- चितरंजन एवेन्यू, कलकत्ता-700006 । 2-12-1999 को हिमाचल प्रदेष के राज्यपाल का कार्यभार ग्रहण किया तथा 24-11-2000 को राज्यपाल, उत्तर प्रदेष के पद पर सुषोभित हुए ।